आदित्‍य ठाकरे के तौर पर पहली बार चुनाव मैदान में उतरा है ठाकरे परिवार का सदस्‍य

नई दिल्‍ली. ठाकरे परिवार (thackeray family) की तीसरी पीढ़ी अब राजनीति के मंच पर नई सोच और नए जोश के साथ तैयार है. राजनीतिक वंशवाद के सफर में राहुल गांधी, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, ज्योतिरादित्य सिंधिया की ही तरह अब हिंदू हृदय सम्राट शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे (bal thackeray) के पौत्र आदित्य ठाकरे (aditya thackeray) भी राजनीति के रण में हुंकार भरेंगे. शिवसेना के इतिहास में यह पहली बार होगा कि चुनाव में शिवसेना को ‘ठाकरे’ का चेहरा मिलेगा. इसके बाद पार्टी मुख्यमंत्री पद के लिए भी दावेदारी पेश कर सकती है. शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे वर्ली सीट से चुनाव लड़ेंगे. शिवसेना के युवराज आदित्य ठाकरे के लिए वर्ली की सीट मौजूदा शिवेसना सांसद सुनील शिंदे ने खाली की.

युवा चेहरा हैं आदित्य ठाकरे

आदित्य ठाकरे शिवसेना का युवा चेहरा हैं और साल 2009 के विधानसभा चुनाव में वो पार्टी के लिए चुनाव प्रचार भी कर चुके हैं. शिवसेना की यूथ ब्रिगेड युवा सेना के भी वो अध्यक्ष हैं. आदित्य ठाकरे ने अपनी राजनीतिक पारी का आगाज जन-आशीर्वाद यात्रा निकाल कर किया. उनकी यात्रा को जनसमर्थन हासिल हुआ. इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य युवा वोटरों को साथ जोड़ना था. इसके अलावा युवाओं से खुद को कनेक्ट करने के लिए उन्होंने कई मुद्दों पर महाराष्ट्र में कई जगह युवाओं के साथ आदित्य-संवाद भी किया.

कवि, गीतकार भी हैं आदित्‍य

आदित्य ठाकरे का जन्म 13 जून 1990 को हुआ था. दादा बाल ठाकरे कार्टूनिस्ट, पिता फोटोग्राफर और खुद आदित्य ठाकरे एक कवि है. इस युवा कवि हृदय ने बॉम्बे स्कॉटिश स्कूल में पढ़ाई के दौरान अंग्रेजी में एक कविता संग्रह ‘माई थॉट इन ब्लैक ऐंड व्हाइट’ लिखा था. इसके अलावा आदित्य की साहित्य में भी रुचि है. उनके लिखे गीतों का एक एल्बम उम्मीद भी लांच हो चुका है जिसमें सुनिधि चौहा, सुरेश वाडेकर, कैलाश खेर और शंकर महादेवन ने सुर दिए हैं.

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तीसरी पीढ़ी के ‘युवराज’ में शिवसेना देख रही भविष्य

ठाकरे परिवार की तीसरी पीढ़ी के युवराज में शिवसेना भविष्य देख रही है. तभी शिवसेना आदित्य ठाकरे में मुख्यमंत्री पद का वारिस भी देखती है. इतना जरूर है कि बीजेपी और शिवसेना के साथ मिलकर चुनाव लड़ने पर अगर राजनीतिक समीकरण शिवसेना के मुताबिक सही और पक्ष में साबित हुए तो आदित्य ठाकरे की उप-मुख्यमंत्री पद पर ताजपोशी सिर्फ कल्पना नहीं होगी.

शिवसेना को अपने राजनीतिक वजूद को नया स्वरूप देने के लिए सत्ता के अहम पद की सख्त दरकार है. हालांकि बीजेपी पहले ही ये साफ कर चुकी है कि वो चुनाव में बड़े भाई की भूमिका में रहेगी यानी मुख्यमंत्री के पद पर बीजेपी अपना दोबारा दावा पेश करेगी. ऐसे में शिवसेना के पास उप मुख्यमंत्री पद का विकल्प है और मौका आने पर शिवसेना ये कार्ड चलने से कतराएगी नहीं.

वर्ली से लड़ रहे हैं चुनाव

आदित्य ठाकरे परिवार के ऐसे दूसरे चेहरे होंगे जो चुनावी मैदान में उतरेंगे. इससे पहले राज ठाकरे की चचेरी बहन शालिनी ठाकरे लोकसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमा चुकी हैं. वह महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव हार गई थीं. वर्ली को शिवसेना की सबसे सुरक्षित विधानसभा सीटों में से एक माना जाता है. यही वजह है कि आदित्य के राजनीति में डेब्यू के लिए वर्ली सीट को तवज्जो दी गई. वर्ली सीट से साल 2009 में सचिन अहीर विधायक बने थे जो कि अब एनसीपी छोड़कर शिवसेना में शामिल हो गए थे. ऐसे में सचिन अहीर से भी आदित्य की उम्मीदवारी और दावेदारी को मजबूती मिलेगी.

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राज ठाकरे ने नहीं उतारा उम्‍मीदवार

वहीं खास बात ये है कि मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने भतीजे आदित्य ठाकरे के खिलाफ उम्मीदवार न खड़ा करने का फैसला किया है. 53 साल के शिवसेना के इतिहास में ठाकरे परिवार की तरफ से किसी भी सदस्य ने चुनाव नहीं लड़ा था और न ही किसी संवैधानिक पद पर रहे. हालांकि साल 2014 में ऐसी राज ठाकरे के चुनाव लड़ने की संभावना बनी थी लेकिन उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा. अब आदित्य ठाकरे की वजह से पार्टी के संविधान में संशोधन हुआ है. देखना होगा कि आदित्य शिवसेना को अपने युवा नेतृत्व से कितनी ऊंचाई दे पाने में कामयाब हो पाते हैं.

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