क्‍या होता है पानी की बूंदों के अंदर, नई रिसर्च से सुलझेंगे कई सवाल!

पानी पृथ्‍वी पर जीवन के सबसे बड़े आधार में से एक है। दुनिया के लगभग सभी जीवों को जीने के लिए पानी की जरूरत होती है। हमारी पृथ्‍वी पर पानी का भंडार तो बहुत विशाल है, लेकिन पीने योग्‍य पानी की मात्रा उसके मुकाबले काफी कम है। पानी की प्रॉपर्टीज को लेकर वैज्ञानिक लंबे समय से रिसर्च कर रहे हैं। आखिर पानी की बूंदों के अंदर क्‍या होता है। वह अपना आकार क्‍यों बदलता है। कम तापमान पर क्‍यों पानी जम जाता है, ऐसे कई सवाल वर्षों से वैज्ञानिकों के जेहन में तैरते रहे हैं।  

रिपोर्ट्स के अनुसार, बर्मिंघम यूनिवर्सिटी और सैपिएन्‍जा यूनिवर्सिटी डि रोमा के रिसर्चर्स ने एक यूनीक वॉटर प्रॉपर्टी का खुलासा किया है। इसे पहली बार तीन दशक पहले प्रस्तावित किया गया था। रिसर्चर्स के मुताबिक पानी दो अलग-अलग तरल पदार्थों में बदल सकता है जिसे फेज ट्रांजिशन कहा जाता है। हालांकि ऐसा बेहद ठंडे तापमान पर होता है। लेकिन पानी ठंडे तापमान पर ठोस होकर बर्फ में भी तो बदल जाता है। 

बिलकुल ऐसा होता है और लगभग 30 साल से वैज्ञानिकों को हैरान करने वाली थ्‍योरी को कन्‍फर्म करने में यही सबसे बड़ी चुनौती बना रहा। वैज्ञानिकों के मुताबिक, पानी के अंदर कुछ ऐसी छुपी हुई रासायनिक क्रियाएं होती हैं, जिस वजहें अभी भी मालूम नहीं हैं। स्‍टडी से जुड़े निष्कर्ष जर्नल नेचर फ‍िजिक्‍स में पब्लिश किए गए हैं। इसमें कहा गया है कि लिक्विड वॉटर की एक मुख्य विशेषता ठंडा होने पर इसकी थर्मोडायनामिक प्रतिक्रिया कार्यों का विषम व्यवहार है।

फ्रांसेस्को साइकोर्टिनो जो अब सैपिएन्‍जा यूनिवर्सिटी डि रोमा में प्रोफेसर हैं और इस स्‍टडी के सह-लेखक थे, वह उस मूल टीम का भी हिस्सा थे, जिसने साल 1992 में पानी में लिक्विड-लिक्विड फेज ट्रांजिशन के विचार का प्रस्ताव रखा था। उन्‍होंने कहा कि हमने पहली बार लिक्विड लिक्विड फेज ट्रांजिशन का एक व्‍यू प्रपोज किया है। उन्‍होंने कहा कि मुझे यकीन है कि यह काम टोपोलॉजिकल कॉन्‍सेप्‍ट के आधार पर नोवल थ्‍योरिटिकल मॉडलिंग को प्रेरित करेगा।

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बर्मिंघम यूनिवर्सिटी के अनुसार, रिसर्चर्स ने अपने सिम्‍युलेशन में पानी के एक कोलाइडल मॉडल का इस्‍तेमाल किया और फिर पानी के दो व्यापक रूप से इस्‍तेमाल होने वाले मॉलिक्‍यूलर मॉडल का उपयोग किया। कोलाइड ऐसे पार्टिकल्‍स होते हैं जो पानी के एक अणु से हजार गुना बड़े हो सकते हैं। 

पेपर के प्रमुख लेखक डॉ. द्वैपायन चक्रवर्ती ने कहा कि पानी का यह कोलाइडल मॉडल मालिक्‍यूलर वॉटर को लेकर जानकारी देता है और दो लिक्विड पदार्थों से संबंधित पानी के रहस्यों को जानने में सक्षम बनाता है। इस रिसर्च का मकदस पानी के अंदर देखना और मॉलिक्‍यूलर लेवल पर होने वाली गतिविधियों और केमिस्‍ट्री का पता लगाना है, जिसका अभी और विश्लेषण किया जा सकता है। 

 

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