जलवायु परिवर्तनः चीन-यूरोप और अमेरिका में भारी सूखा, साल 2022 में जल संकट और रिकॉर्ड गर्मी से झुलस रही दुनिया

हाइलाइट्स

यूरोप में पिछले 500 साल का सबसे भयावह सूखा
जून से अगस्त में रिकॉर्ड गर्मी दर्ज,अफ्रीका में अकाल की चेतावनी

यूरोप. पूरी दुनिया में एक बार फिर जल संकट के आसार बन रहे हैं. पानी की कमी और इसको लेकर मारामारी को लेकर कई फिल्में बन चुकी हैं और उसमें सूखा के संकट की कहानियां दिखती रही हैं. 2009 में बनी एनिमेशन फिल्म रैंगों जैसी फिल्मों की कहानी अब धीरे-धीरे हकीकत में तब्दील होती जा रही है. यूरोप और चीन के कुछ हिस्सों में इस बार तापमान चरम पर पहुंच गया है. दूसरी तरफ अफ्रीका में सूखे की वजह से लाखों लोग भूखे मरने को मजबूर हैं. इसी तरह पश्चिम अमेरिका लगातार बारिश की कमी झेल रहा है.

वैज्ञानिकों का कहना है कि गर्मी और बारिश की कमी अब धीरे-धीरे चलन में आती जा रही है, लेकिन पिछले कुछ महीनों में जो सूखे की हालत देखने को मिली है वह अपने आप में एक नया रिकॉर्ड है. सूखे के हालात को मापने के लिए वैज्ञानिक मिट्टी में नमी के स्तर की माप करते हैं, जिसे सैटेलाइट चित्रों द्वारा मापा जाता है. फिर इस सूखे की हालत को जानने के लिए पिछले तीन महीनों के औसत हालात की तुलना इस सदी के शुरुआत की औसत स्थितियों से की गई, जिससे यह तस्वीर साफ हो सके कि हाल में मौसम के मिजाज में कितने चरम स्तर के बदलाव हुए हैं. यह डेटा मिट्टी की स्थिति और तापमान दोनों पर आधारित है. इसे मिट्टी की नमी में अनियमितता के नक्शे के तौर पर जाना जाता है.

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इससे वैज्ञानिकों को पता चला कि यूरोप के बड़े हिस्से में 2001 से 2016 की अवधि की तुलना में इस बार ज्यादा गर्मी पड़ी और मौसम शुष्क रहा. इसी तरह पश्चिम चीन पूरी तरह सूखे की चपेट में हैं और उसके कुछ इलाके तो अति सूखा प्रभावित हैं. और तो और उप सहारा अफ्रीका और अमेरिका में भयानक सूखे के हालात बने हुए हैं.

यूरोप में पिछले 500 साल का सबसे भयावह सूखा
यूरोपियन संघ के एनवायर्नमेंटल प्रोग्राम कॉपरनिकस के अनुसार यूरोप में इस बार गर्मी में जो सूखे के हालात बने हैं वह शायद इस प्रायद्वीप पर पिछले 500 सालों में कभी अनुभव नहीं किए गए. जब अगस्त के आखिर में सूखे की स्थिति चरम पर थी तब यह आलम था कि लगभग आधे यूरोप की मिट्टी नमी की कमी से जूझ रही थी.

वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन का मतलब यही है कि यूरोप बार.बार और लगातार इसी तरह के सूखे की स्थिति का सामना करेगा. यही नहीं सूखे की वजह से इस साल कृषि, परिवहन और ऊर्जा उत्पादन पर भी व्यापक असर पड़ा है. इसे यूं भी समझा जा सकता है कि राइन नदी जो मालवाहन के लिए सबसे बड़ा नदी मार्ग है. वह इस बार गर्मी में अपने निम्नतम स्तर पर आ गई है, जिस वजह से उसमें जहाजों का चलना मुश्किल हो गया है.

जून से अगस्त में रिकॉर्ड गर्मी दर्ज
इस बार जून से अगस्त के दौरान रिकॉर्ड गर्मी दर्ज की गई. यूरोपियन संघ की एक रिपोर्ट के अनुसार ऐसा अनुमान लगाया गया है कि कम से कम तीन और महीने गर्म और शुष्क होंगे. यूरोप पहले भी सूखा झेल चुका है, लेकिन उसने हाल के सालों में बढ़ी हुई गर्मी और ऊंचे तापमान का रिकॉर्ड कायम होते देखा है.

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चीन में सूखा और बाढ़
इन गर्मियों में चीन ने बहुत लंबे समय तक उच्च तापमान का अनुभव किया. जो दो माह से ज्यादा समय तक चला. चीन के मौसम संबंधी प्रशासन ने बताया कि 1960 ‘जबसे रिकॉर्ड रखना शुरू किया गया‘ के बाद से गर्मी के लिहाज से यह सबसे लंबी अवधि थी. अत्यधिक गर्मी और बारिश की कमी की वजह से चीन की सबसे बड़ी नदी यांग्त्जी सूख गई है. चीन के आधिकारिक डेटा के अनुसार इस बार अगस्त में नदी के ड्रेनेज एरिया में सामान्य से 60 फीसदी कम बारिश हुई, लेकिन जलवायु के चरम का आलम यह है कि जहां एक तरफ दक्षिणी चीन सूखे की मार झेल रहा है. चीन के सालाना जलवायु परिवर्तन अध्ययन के अनुसार देश भर में 2012 के बाद से बारिश में एक नियमित वृद्धि रही है.

अफ्रीका में अकाल की चेतावनी
संयुक्त राष्ट्र ने चेताया है कि पूर्वी इथियोपिया, उत्तरी केन्या और सोमालिया में सूखे के हालात की वजह से करीब 2 करोड़ 20 लाख लोग भुखमरी का शिकार हो सकते हैं. ऑक्सफैम के अनुसार इस प्रायद्वीप पर यह तीसरा साल है जब बारिश कम हुई है और तापमान में बढ़ोतरी हुई है. सोमालिया में मार्च से मई की अवधि में जो बारिश हुई वह 6 दशक में सबसे कम थी. इसी तरह डीआर कांगो और युगांडा में भी औसत की तुलना में सूखे के हालात रहे हैं.

अमेरिका में सूखे के हालात
पश्चिम अमेरिका सालों से लगातार शुष्क और गर्म मौसम की मार झेल रहा है. फरवरी में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार वैज्ञानिकों का यह कहना है कि पश्चिम अमेरिका में पिछले 2 दशकों में जो चरम सूखे के हालात बने हैं ऐसा पिछले 1200 सालों में नहीं देखा गया. गर्मी का आलम यह है कि जहां पानी की कमी हो गई है वहीं जंगल भी आग के हवाले हो रहे हैं.नासा ने बताया है कि अमेरिका का दूसरा सबसे बड़ा जलाशय पॉवेल झील जो एरिजोना और यूटा तक फैला है, वह 1960 के बाद से अब तक के निम्न स्तर पर जा पहुंचा है. क्लाइमेट मॉडल का यह आकलन है कि इस क्षेत्र में दशकों तक औसत से कम बारिश देखने को मिलेगी.

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Tags: Climate Change, Drought

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