बिहार से चौंकाती कहानी, जुड़वां भाई-बहन हैं दो पेड़! क्या है 80 साल पुराने बरगद-पीपल का रहस्य?

रिपोर्ट – धनंजय कुमार

गोपालगंज. पुनर्जन्म की कहानियां आपने सुनी होंगी. फिल्मों में कई बार देखा भी होगा. लेकिन क्या आपने कभी ऐसा सुना है कि इंसान का पुनर्जन्म पेड़ के रूप में हुआ? बात हैरानी की है, लेकिन ऐसी ही एक पुनर्जन्म की कहानी गोपालगंज शहर के सरेया वार्ड-1 में न सिर्फ कही-सुनी जाती है बल्कि विश्वास और मान्यता इतनी है कि यहां बाकायदा पूजा पाठ होते हैं, श्रद्धालु उमड़ते हैं और मनोकामनाएं की जाती हैं. यही नहीं, इन पेड़ों को जीवित मनुष्य रूप में मानने से जुड़ा एक विश्वास यह भी है कि कोई भी डाली या पत्ते तोड़ने जैसा नुकसान नहीं पहुंचाता. जो करता है उसके साथ कुछ बुरा होता है!

कहा जाता है कि बरगद और पीपल के दो पेड़ों के रूप में दो मृतक जुड़वा बच्चों का पुनर्जन्म हुआ. इन पेड़ों की पूजा करने से मनोकामना पूरी होने का विश्वास भी समय के साथ जुड़ गया है. एक समय में सरेया वार्ड-1 की इस रोड को भाई-बहन वाली रोड भी कहा जाता था. हालांकि अब यह शंभू पथ के नाम से जाना जाता है. इन दो जुड़वां पेड़ों की रोचक कहानी इस तरह बताई जाती है.

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सपने में आए थे दोनों मृत बच्चे!

विकास पांडे बताते हैं कि उनके दादा स्वर्गीय महंत पांडे की दो जुड़वां संतानें हुई थीं. एक पुत्र और एक पुत्री. जन्म के कुछ समय बाद ही दोनों की मृत्यु हो गई. ‘कुछ दिन बाद ही दादाजी को सपने में आकर मृतक भाई-बहन ने कहा कि घर के पीछे पीपल और बरगद का छोटा सा पेड़ है. वही हमारा पुनर्जन्म है. हम लोगों की आत्मा भटक रही है. उस पेड़ को स्थान दीजिए और पूजा-पाठ कीजिए. घर-परिवार की उन्नति भी होगी… इसके बाद दादाजी ने वैसा ही किया. तभी से हम इन पेड़ों की पूजा करते हैं, मोहल्ले के लोगों के साथ ही दूरदराज से भी श्रद्धालु यहां बाते हैं.’

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पेड़ों को नुकसान पहुंचाया तो अनहोनी!

विकास बताते हैं कि जो इन पेड़ों की पूजा करते हैं, उनकी मनोकामना पूर्ण होती है. इसके उलट पेड़ को नुकसान पहुंचाने वालों के साथ कोई न कोई अनहोनी होती है. विकास ने बताया कि पास में ही एक घर बन रहा था तब पेड़ की डाली कटवा दी गई. इसके दो दिन बाद ही टहनी कटवाने वाले के घर के एक सदस्य की मृत्यु हो गई. इस घटना के बाद से कोई भी इन पेड़ों को हानि नहीं पहुंचाता. धीरे-धीरे ऐसी मान्यताओं के साथ ये पेड़ बहुत बड़े हो गए हैं. यहां सावन में श्रद्धालुओं की काफी भीड़ उमड़ती है.

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