Bill increasing muslim and ST reservation, introduced in Telangana assembly – News18 हिंदी

तेलंगाना विधानसभा ने रविवार को पिछड़े वर्ग के मुस्लिमों और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षण कोटा बढ़ाने के लिए संबंधित विधेयक पेश किया. इस विधेयक के तहत पिछड़े वर्ग के मुस्लिमों के कोटे में 12 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हो जाएगी, वहीं एसटी श्रेणी में भी आरक्षण कोटा बढ़कर 10 प्रतिशत हो जाएगा.

राज्य के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आरक्षण विधेयक 2017 पेश किया. ये विधेयक राज्य विधानसभा और विधान परिषद के विशेष संयुक्त सत्र में पेश हुआ. विधेयक में अनुसूचित जनजाति के लिए भी शिक्षा और नौकरी में आरक्षण को छह प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है.

सदन में चर्चा के बाद विधेयक कोअब दोनों सदनों से पारित होना होगा. फिर इसे राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए केंद्र के पास भेजा जाएगा, जिसके बाद इसे संविधान की नौंवी अनुसूची में शामिल करने का अनुरोध भी किया जाएगा.

मुख्यमंत्री राव ने स्पष्ट कर दिया है कि आरक्षण केवल सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन के आधार पर प्रदान किए जा रहे हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि ये धर्म या जाति के आधार पर नहीं दिया जा रहा है जैसा कि कुछ पार्टियां लोगों को गुमराह करने के लिए कह रही हैं. इसे ऐतिहासिक दिन बताते हुए राव ने कहा कि तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) ने चुनावों के दौरान पिछड़े वर्ग (ई) और अनुसूचित जनजाति के लिए राज्य में आबादी के आधार पर कोटा बढ़ाने का वादा किया था.

उन्होंने बताया कि अनुसूचित जनजाति को फिलहाल छह प्रतिशत कोटा मिला हुआ है, जबकि उनकी आबादी 2011 के जनगणना के हिसाब से 9.8 फीसदी है. राव ने कहा कि राज्य में 16.3 प्रतिशत की आबादी वाले अनुसूचित जाति के लिए एक प्रतिशत आरक्षण बढ़ाया जाएगा. उन्होंने कहा कि राज्य में अनुसूचित जाति आयोग का गठन किया जाएगा.

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अनुसूचित जाति को फिलहाल राज्य में 15 प्रतिशत आरक्षण मिला हुआ है. जबकि, पिछड़े वर्ग को कुल 25 फीसदी आरक्षण मिला हुआ है. इस कानून से तेलंगाना राज्य में कुल आरक्षण बढ़कर 62 प्रतिशत हो जाएगा.

सीएम ने कहा राज्य को 50 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण की जरूरत

मुख्यमंत्री ने कहा कि 50 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण देने पर कोई संवैधानिक रोक नहीं है. राव ने कहा कि तेलंगाना की 90 प्रतिशत आबादी में पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक शामिल हैं, ऐसे में निश्चित रूप से राज्य को 50 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण की जरूरत है. उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया कि तमिलनाडु और झारखंड पहले से ही 50 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण उपलब्ध करा रहे हैं.

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