New Congress Chief Will Not Be Able To Overcome Shadow Of Rahul – Congress President Election : राहुल गांधी के साए से नहीं उबर पाएंगे नए अध्यक्ष, गहलोत पर सभी की निगाहें

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राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को कांग्रेस का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की चर्चा चल रही है। माना जा रहा है कि यह चुनाव तो होगा चुनाव प्रक्रिया के माध्यम से ही, लेकिन राजनीतिक गलियारों में सवाल यह उठ रहा है कि अगर गहलोत कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते हैं तो क्या वे पार्टी के सबसे मजबूत राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर पहचाने जाएंगे? राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के साथ ही क्या अशोक गहलोत भारत जोड़ो यात्रा के सबसे बड़े चेहरे के तौर पर राहुल गांधी को रिप्लेस कर सकेंगे? क्या वे खुद कांग्रेस की सबसे बड़ी यात्रा में बतौर पार्टी के सबसे बड़े मुखिया के रूप में आगे चलेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि जिस तरीके से भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी ‘वन मैन शो‘ की तरह दिख रहे हैं उससे ऐसा कम ही लगता है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष की भूमिका राहुल गांधी की भूमिका से बड़ी होने वाली है। 

आज दिल्ली में गहलोत, राहुल को मना पाएंगे ?

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। चुनाव से पहले बुधवार को अशोक गहलोत का दिल्ली पहुंचना बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कांग्रेस से जुड़े सूत्रों के मुताबिक अशोक गहलोत पार्टी के प्रमुख नेताओं की पहली पसंद माने जा रहे हैं। ऐसे में गांधी परिवार समेत उन से जुड़े सभी नेता अशोक गहलोत के पक्ष में खड़े भी हैं। पार्टी ने अपने सबसे भरोसेमंद नेता अशोक गहलोत को आगे कर चुनाव लड़ने की भूमिका बनानी शुरू की है। गहलोत ने मंगलवार देर रात जयपुर में पार्टी के विधायकों के साथ बैठक की। बैठक में उन्होंने इस बात की जानकारी दी कि वे बुधवार को दिल्ली पहुंचेंगे। पहले वे राहुल गांधी को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए नामांकन भरने को राजी करेंगे। इस दौरान अगर बात नहीं बनी तो वह खुद चुनावी मैदान में होंगे। और उन्होंने राजस्थान के विधायकों को ऐसे दौर में दिल्ली आने को भी कहा है।

गांधी परिवार के सबसे करीबी हैं गहलोत
अशोक गहलोत के नाम की चर्चाओं के साथ कांग्रेस पार्टी और राजनीतिक गलियारों में भी कई तरह के कयास लगाए जाने लगे हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कहते हैं कि निश्चित तौर पर अशोक गहलोत का नाम आगे करने का सबसे बड़ा मकसद यही है कि वे पार्टी के न सिर्फ वरिष्ठ नेता हैं बल्कि गांधी परिवार के सबसे करीबियों में शामिल भी हैं। यही वजह है कि गांधी परिवार और पार्टी के प्रमुख नेताओं ने गहलोत के नाम को फिलहाल राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में आगे बढ़ाया है। 

थरूर व गहलोत में होगा मुकाबला ?
लेकिन अनुमान यह भी लगाया जा रहा है कि इस बार कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव दो लोगों के बीच में होगा। दूसरा नाम कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर का सबसे आगे चल रहा है। थरूर ने इस संबंध में सोनिया गांधी से मुलाकात भी की है। ऐसे में एक बात तो बिल्कुल स्पष्ट है कि पार्टी ने दो धड़े खुलकर आमने-सामने आएंगे। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता यह सवाल भी उठाते हैं कि गांधी परिवार जिस नेता को आगे करके चुनाव लड़ाना चाहता है क्या वह चुनाव जीतकर अपनी मनमर्जी से सभी फैसले ले सकेगा या वह भी कठपुतली अध्यक्ष की तरह ही काम करेगा? इसको लेकर राजनीतिक गलियारों में तमाम तरह की चर्चाएं चल रही हैं। 

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राहुल अध्यक्ष बनें या नहीं, फर्क नहीं पड़ेगा
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक और कांग्रेस की राजनीति को लंबे समय से समझने वाले डी. दिनेश कुमार कहते हैं कि कांग्रेस के भावी राष्ट्रीय अध्यक्ष की ताकत को इस वक्त चल रहे भारत जोड़ो अभियान के साथ जोड़कर ही देखना होगी। वे कहते हैं कि कांग्रेस का बीते कुछ दिनों का यह सबसे बड़ा अभियान राहुल गांधी की अगुवाई में चल रहा है। कुमार कहते हैं कि इस पूरे अभियान में अभी तक अगर कोई चेहरा सामने आया है तो वह सिर्फ और सिर्फ राहुल गांधी का ही रहा है। उनका कहना है कि राहुल गांधी जिस तरीके से इस पूरे भारत जोड़ो अभियान को लीड कर वन मैन शो की तरह आगे लेकर चल रहे हैं उससे इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है वो पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनें या ना बनें, लेकिन उनकी स्वीकारोक्ति पार्टी में कितनी जबरदस्त है।

दिनेश कुमार कहते हैं कि जिन नेताओं का नाम राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए लिया जा रहा है वह सब इस भारत जोड़ो यात्रा में महज सिर्फ एक चेहरा बनकर ही रह गए हैं। जबकि पूरा का पूरा भारत जोड़ो अभियान राहुल गांधी के चेहरे के साथ ही चल रहा है। वे कहते हैं कि अगर राष्ट्रीय अध्यक्ष का चेहरा बहुत प्रभावशाली होगा तो निश्चित तौर पर भारत जोड़ो यात्रा अभियान में उन्हीं के चेहरे को सबसे आगे रखकर पूरी यात्रा की जाएगी, क्योंकि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव अगले एक महीने के भीतर हो जाएगा जबकि भारत जोड़ो यात्रा लंबी चलनी है।

राहुल गांधी ही सबसे बड़ा चेहरा
राजनीतिक विश्लेषक सुरेंद्र पांडे कहते हैं कि यह बात अलग हो सकती है कि राहुल गांधी को लेकर पार्टी में दो मत हों। लेकिन कांग्रेस को जोड़ने की सबसे बड़ी जमीनी मुहिम भारत जोड़ो यात्रा सिर्फ और सिर्फ राहुल गांधी की लीडरशिप में ही चल रही है। वे कहते हैं कि संगठन को जोड़ने का वैसे तो काम हर कार्यकर्ता का होता है लेकिन जिसका चेहरा आगे होता है वही सबसे बड़ा नेता माना जाता है। फिलहाल इस लिहाज से कम से कम भारत जोड़ो यात्रा की बड़ी मुहिम के माध्यम से पार्टी में राहुल गांधी ही सबसे बड़ी चेहरे माने जा रहे हैं।

पांडे कहते हैं कि जब खुद गहलोत यह कहकर जयपुर से दिल्ली पहुंच रहे हैं कि वे सबसे पहले राहुल गांधी को मनाएंगे कि वह राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन करें और अगर वे नहीं मानते हैं तो गहलोत अपना नामांकन दाखिल करेंगे। ऐसे में यह सोचना कि अगर अशोक गहलोत कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते हैं तो वह सबसे मजबूत राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे, जल्दबाजी होगी।

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राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को कांग्रेस का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की चर्चा चल रही है। माना जा रहा है कि यह चुनाव तो होगा चुनाव प्रक्रिया के माध्यम से ही, लेकिन राजनीतिक गलियारों में सवाल यह उठ रहा है कि अगर गहलोत कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते हैं तो क्या वे पार्टी के सबसे मजबूत राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर पहचाने जाएंगे? राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के साथ ही क्या अशोक गहलोत भारत जोड़ो यात्रा के सबसे बड़े चेहरे के तौर पर राहुल गांधी को रिप्लेस कर सकेंगे? क्या वे खुद कांग्रेस की सबसे बड़ी यात्रा में बतौर पार्टी के सबसे बड़े मुखिया के रूप में आगे चलेंगे।

राजनीतिक विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि जिस तरीके से भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी ‘वन मैन शो‘ की तरह दिख रहे हैं उससे ऐसा कम ही लगता है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष की भूमिका राहुल गांधी की भूमिका से बड़ी होने वाली है। 

आज दिल्ली में गहलोत, राहुल को मना पाएंगे ?

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। चुनाव से पहले बुधवार को अशोक गहलोत का दिल्ली पहुंचना बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कांग्रेस से जुड़े सूत्रों के मुताबिक अशोक गहलोत पार्टी के प्रमुख नेताओं की पहली पसंद माने जा रहे हैं। ऐसे में गांधी परिवार समेत उन से जुड़े सभी नेता अशोक गहलोत के पक्ष में खड़े भी हैं। पार्टी ने अपने सबसे भरोसेमंद नेता अशोक गहलोत को आगे कर चुनाव लड़ने की भूमिका बनानी शुरू की है। गहलोत ने मंगलवार देर रात जयपुर में पार्टी के विधायकों के साथ बैठक की। बैठक में उन्होंने इस बात की जानकारी दी कि वे बुधवार को दिल्ली पहुंचेंगे। पहले वे राहुल गांधी को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए नामांकन भरने को राजी करेंगे। इस दौरान अगर बात नहीं बनी तो वह खुद चुनावी मैदान में होंगे। और उन्होंने राजस्थान के विधायकों को ऐसे दौर में दिल्ली आने को भी कहा है।

गांधी परिवार के सबसे करीबी हैं गहलोत

अशोक गहलोत के नाम की चर्चाओं के साथ कांग्रेस पार्टी और राजनीतिक गलियारों में भी कई तरह के कयास लगाए जाने लगे हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कहते हैं कि निश्चित तौर पर अशोक गहलोत का नाम आगे करने का सबसे बड़ा मकसद यही है कि वे पार्टी के न सिर्फ वरिष्ठ नेता हैं बल्कि गांधी परिवार के सबसे करीबियों में शामिल भी हैं। यही वजह है कि गांधी परिवार और पार्टी के प्रमुख नेताओं ने गहलोत के नाम को फिलहाल राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में आगे बढ़ाया है। 

थरूर व गहलोत में होगा मुकाबला ?

लेकिन अनुमान यह भी लगाया जा रहा है कि इस बार कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव दो लोगों के बीच में होगा। दूसरा नाम कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर का सबसे आगे चल रहा है। थरूर ने इस संबंध में सोनिया गांधी से मुलाकात भी की है। ऐसे में एक बात तो बिल्कुल स्पष्ट है कि पार्टी ने दो धड़े खुलकर आमने-सामने आएंगे। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता यह सवाल भी उठाते हैं कि गांधी परिवार जिस नेता को आगे करके चुनाव लड़ाना चाहता है क्या वह चुनाव जीतकर अपनी मनमर्जी से सभी फैसले ले सकेगा या वह भी कठपुतली अध्यक्ष की तरह ही काम करेगा? इसको लेकर राजनीतिक गलियारों में तमाम तरह की चर्चाएं चल रही हैं। 

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राहुल अध्यक्ष बनें या नहीं, फर्क नहीं पड़ेगा

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक और कांग्रेस की राजनीति को लंबे समय से समझने वाले डी. दिनेश कुमार कहते हैं कि कांग्रेस के भावी राष्ट्रीय अध्यक्ष की ताकत को इस वक्त चल रहे भारत जोड़ो अभियान के साथ जोड़कर ही देखना होगी। वे कहते हैं कि कांग्रेस का बीते कुछ दिनों का यह सबसे बड़ा अभियान राहुल गांधी की अगुवाई में चल रहा है। कुमार कहते हैं कि इस पूरे अभियान में अभी तक अगर कोई चेहरा सामने आया है तो वह सिर्फ और सिर्फ राहुल गांधी का ही रहा है। उनका कहना है कि राहुल गांधी जिस तरीके से इस पूरे भारत जोड़ो अभियान को लीड कर वन मैन शो की तरह आगे लेकर चल रहे हैं उससे इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है वो पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनें या ना बनें, लेकिन उनकी स्वीकारोक्ति पार्टी में कितनी जबरदस्त है।

दिनेश कुमार कहते हैं कि जिन नेताओं का नाम राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए लिया जा रहा है वह सब इस भारत जोड़ो यात्रा में महज सिर्फ एक चेहरा बनकर ही रह गए हैं। जबकि पूरा का पूरा भारत जोड़ो अभियान राहुल गांधी के चेहरे के साथ ही चल रहा है। वे कहते हैं कि अगर राष्ट्रीय अध्यक्ष का चेहरा बहुत प्रभावशाली होगा तो निश्चित तौर पर भारत जोड़ो यात्रा अभियान में उन्हीं के चेहरे को सबसे आगे रखकर पूरी यात्रा की जाएगी, क्योंकि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव अगले एक महीने के भीतर हो जाएगा जबकि भारत जोड़ो यात्रा लंबी चलनी है।

राहुल गांधी ही सबसे बड़ा चेहरा

राजनीतिक विश्लेषक सुरेंद्र पांडे कहते हैं कि यह बात अलग हो सकती है कि राहुल गांधी को लेकर पार्टी में दो मत हों। लेकिन कांग्रेस को जोड़ने की सबसे बड़ी जमीनी मुहिम भारत जोड़ो यात्रा सिर्फ और सिर्फ राहुल गांधी की लीडरशिप में ही चल रही है। वे कहते हैं कि संगठन को जोड़ने का वैसे तो काम हर कार्यकर्ता का होता है लेकिन जिसका चेहरा आगे होता है वही सबसे बड़ा नेता माना जाता है। फिलहाल इस लिहाज से कम से कम भारत जोड़ो यात्रा की बड़ी मुहिम के माध्यम से पार्टी में राहुल गांधी ही सबसे बड़ी चेहरे माने जा रहे हैं।

पांडे कहते हैं कि जब खुद गहलोत यह कहकर जयपुर से दिल्ली पहुंच रहे हैं कि वे सबसे पहले राहुल गांधी को मनाएंगे कि वह राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन करें और अगर वे नहीं मानते हैं तो गहलोत अपना नामांकन दाखिल करेंगे। ऐसे में यह सोचना कि अगर अशोक गहलोत कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते हैं तो वह सबसे मजबूत राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे, जल्दबाजी होगी।

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